होटल रहमानिया का 1960 का एक नायाब इश्तेहार
पटना शहर में इल्म ओ अदब का मरकज़ हुआ करता था, शोरा, अदीबों और अफ़साना निगारों की महफ़िल अलग अलग क़ुतुब ख़ानो में लगा करती थीं। पर 47 के बँटवारे के बाद जैसे ही शहर का ज़वाल हुआ, हर जगह पस्ती आने लगी, लाइब्रेरी बंद होते चली गई। शोरा, अदीबों और अफ़साना निगारों की महफ़िलें क़ुतुबख़ानो से निकल कर चाय की दुकान पर पहुँच गई।
उसी का एक बेहतरीन नमूना है पटना के सब्ज़ीबाग़ का होटल रहमानिया। आज इस होटल के बारे में कहा जाता है की इसमें बड़े बड़े शोरा, अदीब, और अफ़साना निगार के साथ नेता आ चुके हैं। जिनमे सोहैल अज़ीमाबादी से लेकर तारिक़ अनवर तक का नाम क़ाबिल ए ज़िक्र है। आज के दौर में भी यहाँ शायर, अदीब के साथ साथ वकील, प्रोफ़ेसर की महफ़िल जमती है।
पटना के इस धरोहर होटल रहमानिया की बुनियाद बाराबंकी के रहने वाले ग़ुलाम रसूल ने 1948 में डाली थी, उसके बाद उनके बेटे क़ुर्बान अली ने इसे आगे बढ़ाया, आज उनके पोते और परपोते परवेज़ अली और सलमान अली इसे चला रहे हैं।
सब्ज़ीबाग़ पर मौजूद इस होटल में आप चाय के साथ समोसा, कवाब, फ़ालूदा आदि का लुत्फ़ उठा सकते हैं।