सफलता का द्वार

सफलता के आयाम

 

मनोबुद्धिरहंकारश्चित्तम् करणमन्तरम्।
संशयो निश्चयो गर्व: स्मरणं विषया इमे।।
सफलता के चार आयाम
1. मन 2. बुद्धि 3.अहंकार 4. चित्त
◆ मन से वितर्क और संशय उत्पन्न होता है।
◆ बुद्धि निश्चय करती है।
◆ अहंकार से गर्व की अभिव्यक्ति होती है।
◆ चित्त में स्मरण होता है।
किसी भी सफलता में इन चारों का सम्मिलित रूप से बहुत बड़ा योगदान होता है।
प्रथम :मन का योगदान
सफलता के लिए मन के बहुत सारे संशयों को दूर करना होता है। मन के सभी प्रवाहों को नियन्त्रित करना होता है। अपने अनुभवों से जितने संदेहों को दूर किया जा सकता है, करना चाहिए। “आप अपने मन को नियन्त्रित कर सकते है” इस वाक्य में यदि आपको कोई संदेह नहीं है तो समझ लो आपकी सफलता की यात्रा शुभ-संकेतों के साथ प्रारम्भ हो चुकी है। मन ही हमें आलस्य के लिए प्रेरित करता है। मन ही हमें परिश्रम के लिए प्रेरित करता है। आपके मन ने मान लिया आप कुछ नहीं कर सकते तो फिर वास्तव में कुछ नहीं कर सकते। आपके मन ने मान लिया कि आप दुनियाभर में एक हलचल ला सकते है तो लाकर ही रहेंगे। आज के दिन इस बात की परीक्षा लेना कि कहाँ पर आप मन से हारे हो और कहाँ पर आप मन के बूते जीते हो। शाम को सोने से पहले दिनभर का विश्लेषण आपको स्पष्ट कर देगा कि आपका मन आपके नियन्त्रण में है या नहीं।
द्वितीय: बुद्धि का योगदान
बुद्धि आपको कुछ निश्चय करने के लिए प्रेरित करती है। सो जाऊँ या जागूं? पत्थर फेंकूं या ना फेंकू? बैठ कर रोऊँ या मुस्कुरा कर चल दूँ? यह मित्र या वह मित्र? यह पुस्तक या वह पुस्तक? इन जैसी हजारों परिस्थितियां प्रतिदिन हमारे सामने आती है। उनमें शत प्रतिशत आपका निर्णय हो सकता है सही साबित नहीं हो। हर निर्णय को करते समय हमने यदि बुद्धि को जाग्रत अवस्था में रखा तो गलती की संभावना बहुत कम रहती है। निश्चय करते समय अपनी क्षमता, दृढ़ता और विवेक को मस्तिष्क में अवश्य धारण करें।
तृतीय: अहंकार का योगदान
अहंकार एक नकारात्मक अवधारणा है। इसकी अनुपस्थिति सफलता के लिए सहायक है। अहंकार अनावश्यक बड़बोलेपन के लिए प्रेरित करता है। अहंकार आपको छोटे कद का होने पर भी बड़े होने का भ्रम देता है। अहंकार सफलता रूपी समुन्द्र से मीलों पहले मिला हुआ छोटा सा कीचड़मय तालाब है जहाँ के कीचड़ से सनकर भारी हुआ शरीर आपको ऐसा भार देता है जो आपको आगे बढ़ने में बाधा भी देगा, आपको विद्रूप भी करेगा तथा उसमें जैसे जैसे और शुष्कता बढ़ेगी आपको भयंकर कष्ट प्रतीत होंगे। सुन्दर भावनाओं की प्रवाहशील नदी में विश्वास की नाव में बैठकर थोड़ा थोड़ा चप्पू चलाते रहिए, आप समुद्र तक पहुंच जायेंगे।
चतुर्थ: चित्त का योगदान
चित्त स्मरण के लिए है। यह सफलता के लिए अन्तिम लेकिन सबसे प्रभावी मंत्र है। क्या भूलना और क्या याद रखना जिसको आ गया उसे हिमालय पर जाकर तपस्या करने की जरूरत नहीं है। छोटी छोटी सफलताओं, छोटी छोटी उपलब्धियों, अपने द्वारा किये गए छोटे छोटे अच्छे कामों का स्मरण कीजिए बस अभिमान मत पालिए। अपने अच्छे दिनों में अपने बुरे समय को कभी मत भूलिये। बुरे और अच्छे सभी अनुभवों को स्मरण में रखो लेकिन उन बातों को स्थाई रूप से स्मरण में डाल दो जो आपको अपने अच्छे और बुरे दौर में सीखने को मिली है। खुद का कमाया हुआ या अनुभव किया गया ज्ञान खरा सोना है दुनियां की किसी खदान में उससे कीमती कुछ नहीं मिलेगा।

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