मैं देखता हूँ………..

मैं देखता हूँ

मैं देखता हूँ , मैं समझता हूँ , 
मैं महसूस करता हूँ, मुझे बोध है,
बदलाव चाहता हूँ
 मगर मैं बढ़ नहीं पाता हूँ।
कारण है कुछ,
जिसका मुझे बोध नहीं हो रहा।
मैं खोजना चाहता हूँ कारण को
मैं पाना चाहता हूँ लक्ष्य को
मैं डूबना चाहता हूँ अपने आप में
मुझे इन्तजार है ऐसे का
जो मुझे समझे
जो मुझे जीवन का नवीनतम लक्ष्य दे सके।
                                                   
       नरेन्द्र कुमार

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