जीव को इस शरीर में रहते हुए तीन अवस्थाओं से गुजरना पड़ता है।
1. प्रथम जागृत अवस्था जिसमें वह सावधान रहकर सभी लौकिक कृत्य करता है
2. दूसरी स्वप्न अवस्था जिसमें शरीर व इंद्रियों के निष्क्रिय रहने पर भी वह संकल्प मात्र से नाना प्रकार के सुख दुख अनुभव करता है उसे जो भी अनुभव होते हैं वह मानसिक होते हैं यथार्थ में तो वह सोया ही है।
स्वप्न भी एक प्रकार से जागृत अवस्था है क्योंकि इसमें जो अनुभव होते हैं वह काल्पनिक होते हैं वह सपने में उन्हीं वस्तुओं को देखता है जिन्हें वह जागृत अवस्था में देख चुका है या कल्पना किया है।
3. मृत्यु के पश्चात जीव को सूक्ष्म शरीर मिलता है इस सूक्ष्म शरीर में भी आत्मा इसी प्रकार संकल्प मात्र से ही नाना प्रकार के सुखों का अनुभव करती है